Ads 468x60px

Monday, August 27, 2012

"साईं" के दास

कोई तन से दुखी....कोई मन से दुखी....
कोई यार बिन रहे उदास....
थोड़े थोड़े सब दुखी इक सुखी "साईं" के दास :)
 
तेरे दरबार में जब आता हूँ,
भीड़ में ठीक से दर्शन नही कर पाता हूँ,
तेरे नाम लेने से ही मैं शांति पाता हूँ,
इसलिए तेरे नाम के दर्शन सबको कराता हूँ ।।
 
तुम हो राजा हम हैं भिखारी..
तेरी लीला अजब हैं न्यारी..
देता है सबको जो तुझे ध्याये..
मुझे भी तार दे खड़ा हूँ आस लगाये..
 
 

अपने किये कर्मो को तोलने को जी करता है

प्यारे बाबा आज तुम्हारी मस्जिद इक कोने में, बैठने को जीकरता है
तुम्हारे सामने बैठ के तुम्हारे पावन चरणों में बस रोने को जी करता है
कभी कभी ये सोचता हूँ बहुत दिया है तुमने तो, फिर भी ये जीवन मेरा क्या चाहता
है पाने को
प्यारे बाबा बस यह तुमसे जानने को जी करता है, जानने को जी करता है
मैंने अभी तक जीवन में क्या खोया है क्या पाया है, यह दिल कभी क्या आपकी याद
में भी रोया है
अपने किये कर्मो को तोलने को जी करता है, तोलने को जी करता है
बरसों से सो रहा था बाबा तुमने जगाया है, तुम्हारे नाम का सिमरन मुझसे दिन रात
कराया है
प्यारे बाबा रात दिन दर्शन को जी करता है, दर्शन को जी करता है
अब मुझपर भी तुम अपनी कृपा की बरखा बरसा दो, मुझे भी अपने प्यार में तुम जीना
तो सिखला दो
श्रद्धा और सबुरी से आपकी हजूरी में, बस रहने को जी करता है
प्यारे बाबा आज तुम्हारी मस्जिद इक कोने में, बैठने को जीकरता है
तुम्हारे सामने बैठ के तुम्हारे पावन चरणों में बस रोने को जी करता है