Ads 468x60px

Monday, August 27, 2012

"साईं" के दास

कोई तन से दुखी....कोई मन से दुखी....
कोई यार बिन रहे उदास....
थोड़े थोड़े सब दुखी इक सुखी "साईं" के दास :)
 
तेरे दरबार में जब आता हूँ,
भीड़ में ठीक से दर्शन नही कर पाता हूँ,
तेरे नाम लेने से ही मैं शांति पाता हूँ,
इसलिए तेरे नाम के दर्शन सबको कराता हूँ ।।
 
तुम हो राजा हम हैं भिखारी..
तेरी लीला अजब हैं न्यारी..
देता है सबको जो तुझे ध्याये..
मुझे भी तार दे खड़ा हूँ आस लगाये..
 
 

0 comments:

Post a Comment